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| विश्व हिंदी पत्रिका |
मारीशस से प्रकाशित यह वार्षिकी साहित्य व भाषा दोनों ही दृषिट से उपयोगी पत्रिका है। पत्रिका के समीक्षित अंक में जानकारीपरक, ज्ञानवर्धक व विकासोन्मुखी रचनाओं का सुंदर समन्वय है। अंक में विश्व में हिंदी के विविध आयाम के अंतर्गत संग्रह योग्य आलेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें शामिल हैं - विश्व मंच पर हिंदी(दामोदर खडसे), वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में समकालीन हिंदी कविता(अनुजा बेगम), वैशिवक हिंदी एक परिदृश्य(विजया सती) के आलेख शामिल किए गए हैं। अन्य प्रमुख लेखकों में अनिरूद्ध सिंह सेगर, कामता कमलेश, ताकेशि फुजिइ, गेनादी श्लोम्पेर, सुरेश चंद्र शुक्ल, संध्या सिंह, मुनीश शर्मा एवं इंद्रदेव भोला प्रमुख हैं। सभी आलेख हिंदी के वैशिवक स्वरूप से परिचय कराती है।
विदेशों में हिंदी के पथ प्रदर्शक के अंतर्गत प्रकाशित आलेखों में हिंदी के लिए विदेशों में कार्य कर रहे विद्वानों का विवरण व उनके परिश्रम से हिंदी की दशा व दिशा का सार्थक वर्णन किया गया है। तीना जगू मोहेश, आशामोर, कुमार परिमलेंदु सिन्हा, भावना सक्सेना, राकेश कुमार दुबे, उमेश चतुर्वेदी, सत्यदेव प्रीतम प्रमुख हैं।
तकनीक के क्षेत्रा में हिंदी के बढ़ते कदम की व्याख्या करने के लिए समीक्षित अंक में अलग से खण्ड रखा गया है। इसके अंतर्गत सूचना प्रौधोगिकी और देवनागरी लिपि(परमानंद पांचाल), तकनीकी युग में ंिहदंी का प्रचार प्रसार(ललित कुमार) एवं ंिहंदी कम्प्यूटिंग : उपलबिध और चुनौतियां(कविता वाचक्नवी) सहित एम.एल. गुप्ता एवं बालेन्दु्र शर्मा दाधीच के आलेख विशिष्ठ हैं।
अन्य आलेखों में राजेंद्र पी. सिंह, नीरज के चतुर्वेदी, कौशल किशोर श्रीवास्तव, रणजीत साहा, अनीता गांगुली, अजय ओझा एवं रामकुमार वर्मा के आलेखों में नवीनता तथा विषयगत विविधता दिखार्इ देती है। विश्व हिंदी सम्मेलन पर रामदेव धुरंधर एवं वर्षिणी उधो सिंह के लेख ने पत्रिका को विश्व के हिंदी नव जानकारों के लिए उपयोगी बनाया है। इसके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय हिंदी कविता प्रतियोगिता2011 के विजेताओं की कविताएं प्रकाशित कर पत्रिका ने हिंदी कविता को अन्य विदेशी भाषाओं के समझ ंिहं










